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Last Date Mar 31,2021 23:45 PM IST (GMT +5.30 Hrs)

With the change in lifestyle and deepening of western influence, we see one striking difference between modern childhood and the children of previous generation, the lack of Indian ...

With the change in lifestyle and deepening of western influence, we see one striking difference between modern childhood and the children of previous generation, the lack of Indian games. Earlier games had a rich cultural and heritage value and were tools to pass on some ancestral knowledge. They were also suitable for all ages and increased the interaction between generations. If you have any such toy story to share with us that can be an inspiration for others, share with us using #MyToyStory.

Last date of submission is 31.03.2021

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Showing 3233 Submission(s)
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NK Nautiyal 33 minutes 24 sec ago

I remember back in my childhood days I along with my cousin used to play board games like chess and ludo.
During summer vacation my cousin come over and we played ludo under our banyan tree.
Those were the days now ludo also have gone online.
Hurts to see this

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Dr Usha Shukla 1 hour 34 sec ago

एकस्थानीय व्यक्ति प्रकाशन के नाम पर 5000 रुपए ऐठकर भाग गया । उस जमाने में बहुत होते थे पाँच हजार
पिता ने हाथ जोड- लिए बेटा ! तुम्हारे हाथ पीले करने का कर्तव्य करलेने दो। फिर देखना।
आज तक देख ही रही हूँ । अंतर्जालिक माध्यमों के द्वारा अपनी रचना बिखेर देती हूँ .....शायद ब्रह्मांड में बचेरहें मेरे शब्द !
क्योंकि ...अब इस जिह्वा,इस लेखनी को चलने के गिने चुने दिन ही तो रह गए हैं।

57950
Dr Usha Shukla 1 hour 8 minutes ago

कस्बे में बसे मध्यमवर्गीय ब्राह्मण परिवार में दूसरी भी बेटी पैदा हो घरवाले क्या बाहरवाले सबकी त्योरियाँ चढ़ जाती हैं। दाई ने आकर कहा - बिटिया हैफिर से,किसी ने अबकी नहीं कहा लक्ष्मी आई है।खैर एक शिक्षिका जो घर में किरायेदार की हैसियत से रहती थीं धीरे से बोली -‌सरस्वती आई है।
थोड़ी सी कृपा तोथी सरस्वती की लेकिन......22-24 की उम्र में ही एकार्थ-काव्य लिखा था -द्रोण-व्यथा ,नौकरी में आगई थी सो प्रकाशन का भूत चढा डॉ शिवमंगल सिंह सुमन और अंचलजी जैसे साहित्यकारों की सम्मतियाँ भी मिल गईं ।

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ARUN KUMAR GUPTA 4 hours 28 minutes ago

खिलौने ऐसे होने चाहिए जिससे बच्चों का खेल खेल में ही मानसिक और शारीरिक विकास हो सके और जीवन में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त हो सके
बच्चों को हिंसक प्रवृत्ति को बढ़ावा देने वाले खिलौने न दे

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Ramesh Kumar HUF 4 hours 47 minutes ago

सेमल के फूल वसंत की आगवनी को तैयार है। पेड़ के नीचे पथार रहते हैं फूल। कुछ कोंहड़ी भी गीर जाते हैं।

बस बन गई जोगाड़ बच्चों की। कोंहड़ी चुना और उसमें बांस या माचिस का तीली बीचोबीच उपर में खोंस दिया। और ऊंगलियों के सहारे नचा कर समतल जमीन या फर्श पर फेंक दिया। लट्टू तैयार हो गया। जितने बच्चे उतने मुफ्त के खिलौने।

बनाने का मजा नचाने का मजा। घूर्णन के सिद्धांत का पूर्वाभास। अभी सेमल के फूलने का मौसम जारी है।
बच्चे उसकी मांग करेंगे और अपने नैसर्गिक खेलने से लाभ बताएंगे तब तक देर हो चुकी होगी।