कालीन बुनाई का संवर्धन पर अपने विचार साझा करें

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Last Date May 01,2015 00:00 AM IST (GMT +5.30 Hrs)
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कालीन की बुनाई भारतीय वस्त्र उद्योग का महत्वापूर्ण और अभिन्नन अंग ...

कालीन की बुनाई भारतीय वस्त्र उद्योग का महत्वापूर्ण और अभिन्नन अंग है। भारतीय कालीन का निर्यात वर्ष 2013-14 के दौरान 1 बिलियन अमरीकी डॉलर को पार कर गया और वर्ष 2014-15 के दौरान घरेलू बिक्री सहित यह 8000 करोड़ रु. तक पहुंच जाएगा।

वस्त्रं मंत्रालय विशाल मात्रा में उत्पाहदन, रोजगार और कालीन का निर्यात बढ़ाने और विकास की प्रतिभागिता और समावेशी ‘सबका साथ सबका विकास’ के अंतिम उद्देश्य को प्राप्ते करने के लिए ‘जीरो डिफेक्टा और जीरो इफेक्टय’, ‘स्किल, स्के‍ल और स्पीयड’ पर विशेष जोर देते हुए माननीय प्रधानमंत्री की ‘मेक इन इंडिया’ पहल के अंतर्गत कालीन उद्योग के संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध है।

इस प्रयास के भाग के रूप में उत्तधर प्रदेश तथा कश्मीीर और नए क्षेत्रों में परंपरागत कालीन बुनाई क्षेत्रों के आस-पास के क्षेत्रों में कालीन बुनाई में इच्छुेक व्यफक्तियों, विशेष रूप से महिलाओं की पहचान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शिल्पाकारों के समूह को गांव में 4 महीने का प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा और प्रशिक्षण पूरा हो जाने पर शिल्पमकारों को अपने घरों में वाणिज्यिक पैमानों पर कालीन की बुनाई करने के लिए करघे, उपकरण और अन्ये सहायता प्रदान की जाएगी। शिल्प कारों के समूह के लिए लगभग 50 लाख रुपए की लागत से कच्चीप सामग्री का भंडारण करने के लिए गोदाम की सुविधा के साथ सामान्यु सुविधा केंद्र, इंटरनेट की सुविधा के साथ कार्यालय, आराम कक्ष और प्रशिक्षण शेड की स्थारपना की जाएगी। इसके अलावा नए डिजाइन के विकास तथा प्रशिक्षण आयोजित करने के लिए अपेक्षित सहायता प्रदान की जाएगी। कालीन निर्माण और निर्यात से संबंधित उद्यमी को इन समूहों के साथ जोड़ा जाएगा। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद राष्ट्री्य डिजाइन और उत्पांद विकास केंद्र (एनसीडीपीडी) की सहायता से इसे क्रियान्वित करेगा। इसके अलावा बाल मजदूरी की किसी घटना की जांच करने जैसे सामाजिक अनुपालन और ‘विन-विन’ की स्थिति का निर्माण करने के लिए किसी प्रकार के प्रदूषण की जांच करने जैसे पर्यावरणीय अनुपालन और धारणीय विकास के लिए उचित ध्यालन दिया जा रहा है।

कारपेट एक्सपो -2015 में भाग लेने वाले उद्यमियों को शिल्पाकारों के एक समूह को अपनाने और बाजार की मांग के अनुसार कोटिपरक कालीन का उत्पामदन करने के लिए आवश्य क विपणन सहायता प्रदान करने का अनुरोध किया जाता है। इससे उनके निर्यात में वृद्धि होगी और सामाजिक रूप से समावेशी विकास होगा।

उद्यमियों को इस विषय पर अपने विचार भेजने के लिए आमंत्रित कर रहे हैं।

आप अपनी टिप्पणियां 30 अप्रैल 2015 तक भेज सकते हैं।

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HP JALAN 4 साल 7 महीने पहले

Till the carpet weavers are fragmented/scattered, the industry cannot survive in this competitive world. The Industry has to go for fashion, design, brand, quality standard and marketing. The only solution is similar to AMUL. Create cooperatives with large scale organization and structure, which lead the carpet weavers to international level.

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DR RANJAN KUMAR MOHANTY 4 साल 7 महीने पहले

OTM HAS ITS OWN INFRASTRUCTURE.POLITICIANS HAVE SPOILED IT.GOVT. SHOULD TAKE UP AND RUN.A STRONG ADMINISTRATOR IS REQUIRED.STAFF QUARTERS AND INDUSTRY CAN BE MODERNISED.50% EMPLOYMENT PROBLEM CAN BE SOLVED.PEOPLE WILL BE HIGHLY OBLIGED.THEY WILL WORSHIP MODI LIKE GOD.

22120
DR RANJAN KUMAR MOHANTY 4 साल 7 महीने पहले

ORISSA TEXTILE MILL IN CHOUDWAR SHOULD RUN AS IT IS THE OLDEST TEXTILE INDUSTRY IN ASIA WHICH HAS ITS OWN BRAND.IT WAS THE DREAM-CHILD OF LATE BIJU PATTANAIK.HIS SON NAVEEN PATTNAIK COULD NOT DO ANYTHING.IT WILL BE THE HAPPIEST MOMENT FOR PEOPLE OF ODISHA LIKE FCI IN TALCHER.

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VINAYAK D N S JAMWAL 4 साल 7 महीने पहले

Carpets weaved by local artisans should be used for branding of government offices and the corportates. While local artisans will get jobs, the same would help build a positive image of government offices and the corporates (PSUs) etc. Special training programmes should be launched to train these carpet weavers to fit their products to the demand corporate branding. This why we can encourage Swadeshi and at the same time weavers will earn livelihood and the PSUs will also get branded facelift.

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VRIJAL JAYESH SHAH 4 साल 7 महीने पहले

All small and tiny carpet weaving units and individuals should be integrated into various medium or large size unit.This will increase the productivity as wellas carpet weavers will get right value for their work and design. Also every weaver should register or patent his/her design.Also making in very few numbers like only 2-3 of those best designs(not all designs) that a weaving unit have making it so precious that it can be sold in lakhs and crores to crorepatis.Dedicated Website for selling.

400
Dinesh Kulkarni 4 साल 7 महीने पहले

Our PM ji,
आपनॆ सुभाश चम्द्र् भॊस कॆ मॊउत कॆ सारॆ रिपॊर्ट सार्वजनिक करनॆ का निर्णय लिया है ए अच्छा बात है. लॆकिन साथि साथ शास्त्रिजी का मॊउत कॆ रिपॊर्ट भि सार्वजनिक किया जाय, और श्यामा प्रसाद मुखर्जी का भि मॊउत कॆ रिपॊर्ट सार्वजनिक किया जाय.

ए आप सॆ विनम्र विनम्ति है.