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आरंभ करने की तिथि :
Dec 05, 2025
अंतिम तिथि :
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Jaishankar Krishnamoorthy
2 महीने 6 दिन पहले
Respected Prime Minister, I would like to put before you my perspective on Uniform Civil Code.
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Shailypandey
2 महीने 6 दिन पहले
“Respected Prime Minister of India,
I am a student and a responsible citizen of our country. Through Mann Ki Baat, I wish to share a concern that affects millions of common people at the grassroots level.
“General category students often feel overlooked in the current reservation system despite facing intense competition, financial pressure, and academic stress. Even after scoring high marks, many deserving general students lose opportunities, which creates frustration and a sense of injustice. When corruption and misuse of reservation benefits are added to this, the problem becomes even more serious. There is a strong need to reform the system so that general students are treated fairly and opportunities are based on merit and genuine need, ensuring equality and confidence among all students.”
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Sooryanarayanan P H
2 महीने 6 दिन पहले
Unemployment and essay to access the document to elder people
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OM PRAKASH SINHA
2 महीने 6 दिन पहले
माननीय प्रधानमंत्री जी, सादर प्रणाम। इस आर्टिकल के माध्यम से रासायनिक दवा खासकर चूहा मारने की दवा के प्रकृति पर पड़ रहे बुरे प्रभाव की ओर ध्यानाकर्षण करना चाहता हूं।
हम मनुष्य किसी चूहा को चूहे मारने की दवा ( जिंक फास्फेट ) से मारते हैं, तो केवल चूहा को हम नहीं मारते। बल्कि इससे चूहा के साथ इसे खाने वाले पक्षियों ( गिद्ध, चील etc), सांपों और जानवरों( बिल्लियां, कुत्ते ) इत्यादि की भी हत्या करते हैं। एक पूरी खाद्य श्रृंखला मर जाती है। हम मनुष्यों के चूहे को जहर से मारने के कारण ही गिद्ध पक्षी किडनी फेल की बीमारी से तड़प तड़प कर मर गए।अर्थात् हम चूहे की जहर से प्रकृति की हत्या लगातार करते जा रहे हैं । जब हम प्रकृति को जन्म नहीं दे सकते, तो मारते क्यों हैं?
फिर ये गिद्ध, बाज, चील,सांप, बिल्लियां इत्यादि ही तो प्रकृति के फूल हैं, जो प्रकृति की सुंदरता बढ़ाते हैं।अतः हमें ऐसे अति सुंदर दिखने वाले प्रकृति के फूलों को बचाना है, तो चूहे या किसी भी जीव को मारने वाली दवा का उपयोग साफ बंद करना होगा और इसके विकल्प ( जैसे चूहाजाल ) तलाशने होंगे।
जय हिन्द 🙏 🙏
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Aman Kumar
2 महीने 6 दिन पहले
माननीय प्रधानमंत्री जी,
जब मैं अपने बचपन को याद करता हूँ तो उम्र से पहले कंधों पर आई ज़िम्मेदारियाँ याद आती हैं। कक्षा 8 में पढ़ते हुए रोज़ सुबह 4 बजे गांव-गांव अख़बार बाँटना, रास्ते में कपड़े बदलकर स्कूल पहुँचना और कई बार थकान से साइकिल चलाते हुए रो पड़ना—पढ़ाई के लिए यह सब किया। बाल श्रम, सामाजिक भेदभाव और अवसरों की कमी के बीच पीड़ा से यह संकल्प जन्मा कि मेरे बाद कोई युवा केवल अपनी पृष्ठभूमि के कारण पीछे न छूटे।
इसी सोच से मैंने युवाओं को छात्रवृत्ति, इंटर्नशिप और सरकारी कार्यक्रमों की जानकारी जोड़ने का काम शुरू किया, जो आज 84 लाख से अधिक युवाओं तक पहुँचा। कांवड़ यात्रा के दौरान अख़बारों में श्रद्धालुओं की समस्याएँ पढ़कर प्रशासन के साथ मिलकर बनाए कांवड़ यात्रा एप से लाखों लोगों को मदद मिली।
मेरी विस्तृत यात्रा, ठोस उदाहरण और कार्यों का विवरण संलग्न PDF में है। यदि राष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर आप ग्रामीण युवाओं को शासन के इम्पैक्ट डिलीवरी सिस्टम का सहभागी बनाने की बात करें, तो यह विकसित भारत 2047 की दिशा में सच्ची प्रेरणा होगी।
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OM PRAKASH SINHA
2 महीने 6 दिन पहले
आदरणीय प्रधानमंत्री जी, आपको सादर प्रणाम। आज मैं दो तस्वीरों के माध्यम से प्रकृति की घटती सुंदरता की ओर ध्यानाकर्षण करना चाहता हूं।
बाएं से पहले चित्र, P47 के नाम से मशहूर प्रकृति की सुंदरता में चार चांद लगाने वाला यह शेर दक्षिणी कैलिफोर्निया में मृत पाया गया था। इसके शरीर में चूहे मारने का जहर मिला हुआ था। जिसने भी चूहा मारने का जहर दिया होगा, वो तो यह मान कर चला होगा कि केवल चूहा को मारना है, पर चूहे को बिल्ली या कुत्ता खाया होगा और उसे यह शेर। इस प्रकार एक बड़े जानवर की हत्या चूहे के दवा से की गई थी।
बाएं से दूसरा चित्र, ये उल्लू जब जीवित था, तो प्रकृति की सुंदरता बढ़ाने में खूब अच्छे से योगदान देता था। पर यह मारा गया। इसके शरीर में भी चूहे मारने का जहर मिला हुआ था।
ये दो तस्वीर तो उदाहरण मात्र हैं। इस प्रकार से तो शेर, उल्लू के साथ गिद्ध जैसे और भी कई जानवरों के रूप में हम प्रकृति की हत्या कर रहे हैं। प्रकृति ने हम मनुष्यों को जन्म दी है। क्या जन्म देने के बदले हमें प्रकृति को यह देना चाहिए?
ऐसी दवाओं का विकल्प वैज्ञानिक तरीके से तलाशी जानी चाहिए।
जय हिन्द जय भारत 👏 👏
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Ashish moon
2 महीने 6 दिन पहले
Jai hind
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Pragyajha
2 महीने 6 दिन पहले
Women safety, corruption, unfair treatment of those who represent our country, lack of civic sense, poverty, and pollution!!!!??
While new ideas and ambitious visions are important, the government must prioritize strengthening existing systems before introducing new initiatives. Without ensuring women’s safety, controlling corruption at the root level, and cultivating civic responsibility among citizens, the impact of new policies remains limited.
BASE PHELE STRONG KARO, FIR IMARAT BANANA.
Nation-building cannot succeed if the basics are weak.
Effective implementation of existing laws, greater transparency in governance, efficient grievance redressal mechanisms, and civic education from the school level should be treated as top priorities. Addressing these core challenges will ensure that future initiatives are meaningful, sustainable, and truly beneficial for the nation.
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Dhananjay Pratap Singh
2 महीने 6 दिन पहले
3️⃣1️⃣ सर्वर डाउन होने की स्थिति में तत्काल सूचना दी जाए।
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BajrangSingh
2 महीने 6 दिन पहले
माननीय प्रधानमंत्री महोदय प्रणाम, मैं बजरंग सिंह गांव रानीपुरा ,विधानसभा क्षेत्र खंडेला, जिला सीकर राजस्थान में पिछले पांच वर्षों से पर्यावरण संरक्षण का कार्य कर रहा हूं। पांच वर्षों में मैं खाटूश्यामजी व जीणमाताजी मेलों में जाकर चार लाख के लगभग श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों को जागरुक कर चुका हूं। मैंने घर पर ही गोमूत्र व छाछ से कीटनाशक तैयार कर क्षेत्र में हजारों बड़े पेड़ों को दीमक के प्रकोप से बचाया हैं तथा श्रावण मास में चार-पांच दोस्तों को साथ लेकर गांव व बाजार में घरों की छतों या दीवारों में जो बड़े पीपल व बरगद के पौधे उगे हुए थे उनको सुरक्षित तरीके से हटकर सार्वजनिक स्थानों (जोहड़ो) पर लगाकर स्थानीय लोगों को भी पौधे लगाने के लिए प्रेरित किया। साथ ही में विद्यालयों मे जाकर स्कूली बच्चों को उत्तर रामायण का एक छोटा सा वीडियो दिखा रहा हूं जिसमे सीता माता अपने दानों पुत्रों को पेड़ नहीं काटने तथा पर्यावरण संरक्षण की बात बता रहीं हैं इस वीडियो के माध्यम से में स्कूली बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए जागरूक कर रहा हूं।कृपा मेरे इस सामाजिक कार्य की "मन की बात" कार्यक्रम मे चर्चा करें।
mygov_1766762512126774891.pdf
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