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खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में प्रभावशाली बदलाव हेतु सुझाव आमंत्रित

भारतीय अर्थव्यवस्था में खाद्य प्रसंस्करण एक तेजी से उभरता क्षेत्र ...
भारतीय अर्थव्यवस्था में खाद्य प्रसंस्करण एक तेजी से उभरता क्षेत्र है। इसमें खाद्य पदार्थों की बर्बादी और फसल के बाद के नुकसान को कम करने, किसानों की आय में वृद्धि, खाद्य मुद्रास्फीति को कम करना, उच्च गुणवत्ता वाले पोषक तत्वों की उपलब्धता और एक सस्ती पर सुरक्षित खाद्य उत्पादों कीमत आदि में महत्वपूर्ण योगदान देने की क्षमता है।
हाल के वर्षों में कृषि, डेयरी, मांस और बागवानी उत्पादों की वृद्धि के साथ, भारत अब एक फूड सरप्लस राष्ट्र है और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए तैयार कच्चा माल आसानी से उपलब्ध है। फसल कटाई के बाद अपेक्षाकृत उच्च नुकसान, प्रसंस्करण का शुरुआती स्तर और देश का बड़ा उपभोक्ता बाजार से स्पष्ट है कि इस क्षेत्र के वृद्धि की देश में अभी असीम संभावनाएं हैं।
खेत से लेकर खाने की प्लेट तक की पूरी आपूर्ति श्रृंखला / खाद्य प्रसंस्करण के लिए एक मजबूत और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे के विकास और विस्तार हेतु खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) ने अपनी प्रमुख योजना-प्रधानमंत्री किसान सम्पदा योजना (पीएमकेएसवाई) की शुरुआत की है।
उपयुक्त नीतिगत उपायों, योजनाओं, कार्यक्रमों के माध्यम से खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की पूर्ण क्षमता के इस्तेमाल हेतु MoFPI प्रभावशाली कदम उठाना चाहता है। MoFPI इस संबंध में सभी क्षेत्र के लोगों व विशेषज्ञों से सुझाव और विचार आमंत्रित करता है।
सबसे उपयुक्त तीन विचारों / सुझावों को इस उद्देश्य हेतु गठित समिति द्वारा क्रमशः 25,000 / - रु. , 20,000 /रु. - और रु 15,000 /रु. का नकद पुरस्कार दिया जाएगा
सुझाव भेजने की अंतिम तिथि 7 जुलाई, 2019 है।
नियम और शर्तें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें।