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समावेशी भारत पहल प्रतियोगिता - सभी के लिए समावेशी सोसायटी की ओर प्रगति पथ

स्वयं-वकालत या जिसे आप सेल्फ एडवोकेसी कहते हैं| ये वे होते हैं जो अपनी ...
स्वयं-वकालत या जिसे आप सेल्फ एडवोकेसी कहते हैं| ये वे होते हैं जो अपनी जिंदगी पर नियंत्रण कर रहे होते हैं खासकर इसमें उनकी अपनी चिकित्सा आवश्यकताओं के प्रभार भी शामिल होते हैं। स्वयं-वकालत आंदोलन ही तो विकलांग लोगों के बारे में खुद के लिए बोल रहा है और दूसरों को इस जीवन से प्रेरणा लेने के लिए प्रेरित करता है। इसका मतलब ये है कि है कि एक विकलांग व्यक्ति दूसरों के समर्थन के बिना भी आगे बढ़ सकता है| व्यक्ति को अपने स्वयं के संसाधनों के नियंत्रण में रखकर किसी भी काम या चीज को निर्देशित करना मायने रखता है। जिसका वह हकदार है । मतलब साफ है कि वो दूसरों के द्वारा अनुचित प्रभाव या नियंत्रण के बिना जीवन निर्णय लेने का अधिकार वह रखता है ।
इस प्रतियोगिता में कौन भाग ले सकता है?
विकासात्मक और बौद्धिक विकलांगता के साथ फोकस ग्रुप के सेल्फ एडवोकेसी
प्रविष्टियां जमा करने की श्रेणियां:
1. वीडियो
2. लेख / निबंध / कहानियां
विषय:
1. विश्व को आपकी सफलता की कहानियां सुनने में खुशी होगी। हमारे साथ शेयर करें।
2. एक संस्था को किस तरह विकासात्मक और बौद्धिक विकलांग लोगों के लिए अनुकूल बनाया जा सकता है
3. आपकी सफल यात्रा में आने वाली बाधाएं क्या रही और आप इसे कैसे दूर करते रहे हैं?
4. फोकस समूह को शामिल करने के लिए अपनाई जाने वाली विशेष तकनीकों पर एक नोट लिखें।
प्रतियोगिता की समय सीमा- 5 जुलाई 2017
प्रस्तावित पुरस्कार राशि:
पहला पुरस्कार - रु 5,000 / -
दूसरा पुरस्कार - रु 3000 / -
तीसरा पुरस्कार - रु 2,000 / -
नोटः भागीदारी की प्रमाणपत्र सभी प्रविष्टियों को दिया जाएगा।
इस प्रतियोगिता से जुड़े नियम और शर्तों को जानने के लिए आप यहां क्लिक कर सकते हैं
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